Sunday, March 25, 2018

एक सुबह अखबारों वाली, एक गर्म चाय के प्यालों वाली

एक दिन ऐसा भी देना जिसको
बराबर जीने का अधिकार हो,
एक रात दे देना ऐसी जिसमें
डरावना ना अंधकार हो।
एक काम ऐसा दे देना मुझको
जिसे बांटने वाला परिवार हो,
एक काम दे देना ऐसा जिसमें
बराबरी की पगार हो।
एक सुबह अखबारों वाली
एक गर्म चाय के प्यालों वाली
दे देना प्रभाष ऐसी सुबह जो
नींद दे दे कई सालों वाली।
एक शाम कोई पांव दबाए,
एक सुबह कोई बाल सहलाए
छोड़ो महिला दिवस की बातें,
यूंही से कुछ दिवस तो आए।

ORIGINALLY PUBLISHED / 8TH MARCH 2018 / FACEBOOK

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