Friday, March 7, 2014

Here's a little love on Women's day

सबरी  के  बेर जूठे थे , मीठे थे
 खा के वही तो राम रावण हराए थे। 
जो सीता न होतीं तो राम राज्य न होता
वो धरती समाई, ये सरयु समाए थे।

गैया ने मैया बन दूध बहाया था
 तो ही तो कान्हा किसना बने थे।
जो राधा न होतीं तो श्याम न होता
वो जो मीरा की तृष्णा बने थे।

बैठो ज़रा ये कहानी सुनो
की कैसे बना ये ताज़महल।
मुमताज़ न होती तो ये पत्थर ही होता
फ़िर कहाँ तस्वीर खिंचवाते तुम कल।

रानी झाँसी लड़ी थी, ग़दर हुआ था
फ़िर तो तिरंगा लहराना ही था।
जब कण कण में दुर्गा , मन  मन  में काली हो
फ़िर  तो  विमेंस डे मनानाही था।


3 comments:

Tanaya said...

Wonderful...

Varsha Raghu said...

Beautiful

Anonymous said...

Beautiful. So sensitive and with such depth!